

किसी भी राष्ट्र की सामाजिक एवं सांस्कृतिक उन्नति वहां की शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। एक विकसित राष्ट्र जितना ध्यान अपने यहां कारखाने खोलने, बांध और सड़कें बनाने पर देता है उससे कहीं अधिक ध्यान वह अपने नागरिक ों को शिक्षित करने पर देता है। अत: साक्षरता व्यक्ति और देश की उन्नति की महत्तवपूर्ण शर्त है। अच्छी शिक्षा से ज्ञान की वृध्दि होती है, नम्रता आती है, भले बुरे का भेद जानने की क्षमता विकसित होती है और इससे वह समाज का योग्य व्यक्ति बन जाता है। इसलिए विद्या को मनुष्य का स्थायी आभूषण कहा गया है। भारत का प्राचीन इतिहास ज्ञान एवं शिक्षा के विकास की दृष्टि से बहुत अग्रणी रहा है किन्तु पिछले 200 वर्षों में ज्ञान और शिक्षा की दृष्टियों से निरन्तर गिरावट आई है। यदि हम 2001 की जनगणना के आंकडाें पर नजर डालें तो हमारे देश में 64.84 प्रतिशत व्यक्ति ही साक्षर हैं और 30 करोड़ व्यक्ति अभी भी हमारे देश में ऐसे हैं जो शिक्षा से वंचित हैं। भले ही आज विद्यालयाें एवं महाविद्यालयाें की संख्या पहले से अधिक है परन्तु उनमें पढाई के साधनाें की कमी है। सबसे बुरी हालत तो प्राथमिक शालाआें की है, क्याेंकि वो मूलभूत सुविधाआें एवं प्रशिक्षित अध्यापकाें के लिए तरस रहे हैं। पिछले दिनाें हुए एक सर्वेक्षण पर नार डालें तो भारत में एक लाख विद्यालय ऐसे हैं जो सिर्फ एक कमरे में ही चल रहे हैं तथा अन्य 75000 विद्यालय ऐसे हैं जिन्हें एक कमरा तक नसीब नहीं है । देश के 15 प्रतिशत स्कूलाें में एक से अधिक शिक्षक नहीं है। देश में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों की संख्या 15 से 42 प्रतिशत के बीच है। पिछले सालाें में हुए आकस्मिक निरीक्षणाें के दौरान आधे से भी कम शिक्षक पढाते मिले। निश्चित तौर पर यह सरकार के लिए चिंता की बात है क्योंकि इन्हीं कारणाें की वजह से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर चीन और थाईलैंड जैसे विकासशील देशाें से शिक्षा के क्षेत्र में हम अभी भी पीछे हैं। आज हमारे देश में बालक बालिकाआें को जो शिक्षा दी जाती है, उसमें रटने की परम्परा को अधिक बढावा मिल रहा है, इससे विद्यार्थियाें का उचित विकास नहीं हो पा रहा है। उनमें रोजगार-प्रधान शिक्षा का अभाव है। एक अनुमान के अनुसार देश में हर 5 में से केवल 1 व्यक्ति ने व्यावसायिक प्रशिक्षण लिया हुआ होता है जबकि चीन एवं थाईलैंड जैसे अन्य विकासशील देशाें में यह दर 5 मेें से 4 की है। इसी कारण से हमारे देश के नवयुवकाें को पढ़ाई पूरी करने के बाद भी राोगार के लिए भटकना पड़ता है। वर्तमान समय में सरकार द्वारा शिक्षा को सभी स्तराें पर प्रोत्साहित करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान, मिड डे मील, डी पी ई पी जैसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाआें का मुख्य उद्देश्य देश में लगभग 1.1 मिलियन बच्चाें को अच्छी शिक्षा प्रदान कराना तथा विद्यालयाें में मूलभूत सुविधाआें के अभाव को दूर करना है, परन्तु हमारे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण यह योजनाएं आशा के अनुरूप परिणाम नहीं दे पाईं। हमारी विश्वविद्यालय प्रणाली, कई भागाें में जीर्णता की स्थिति में है। देश में लगभग आधे जिलाें में उच्च शिक्षा की स्थिति दयनीय है। हमारे देश के लगभग दो तिहाई विश्वविद्यालय और 90 प्रतिशत कॉलेज गुणवत्ता के मानकाें पर खरे नहीं उतरते। कई रायाें में विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष, वाईस चांसलर्स जैसे महत्तवपूर्ण पदाें की नियुक्तियाें मे भ्रष्टाचार और पक्षपात की आ रही शिकायताें से मैं चिन्तित हूं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का उक्त कथन हमारी शिक्षा प्रणाली की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालता है। अत: हमारे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को इन जमीनी हकीकताें को बदलना होगा तभी हमारा राष्ट्र पूर्ण रूप से साक्षर हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं हम अन्य शिक्षित व्यक्तियाें का कोई दायित्व नहीं बनता क्याेंकि लोकतंत्र में कोई भी विकास कार्य, योजना अथवा अभियान जनता की जागरूकता एवं सहभागिता के बिना संभव नहीं है। इसलिए साक्षरता संबंधी कार्यक्रमाें को भी और अधिक जन-सहभागिता आधारित किए जाने की आवश्यकता है। जब तक समाज में सीखने वाले और सिखाने वाले दोनाें नजदीक नहीं आएंगे तब तक साक्षरता संबंधित कोई भी कार्यक्रम सफल नहीं बन सकता।

अभी भी हम संख्या में उलझे हैं गुणवत्ता तो दूर ही है
जवाब देंहटाएंफ़िकर नॊट! कभी न कभी तो पार लग ही जाएंगे:)
जवाब देंहटाएंsach much.narayan narayan
जवाब देंहटाएंatyant umda aalekh
जवाब देंहटाएंbadhaai !
aapka kathan to sahi hai lekin sarkaar bhi to shiksha ke gunvatta ko girane par hi lagi hai mera ishara private universities ki or hai
जवाब देंहटाएंBahut sundar rachana..really its awesome...
जवाब देंहटाएंRegards..
DevSangeet
क्या किया जाये ? पूरा देश तो ' फिकर नाट ' मोड पर चल रहा है .हर चीज की गुणवत्ता खतरे में है .
जवाब देंहटाएंअच्छा आलेख .
आपका स्वागत है .
Yes the condition of education in our country is really serious. Great blog. Keep writing.
जवाब देंहटाएंThanx all of you for your valuable comments
जवाब देंहटाएंSaabse bada daan....vidyadaan..agar hum aapne paas hi ek bhi ashikshit vyakti ko saakshar banaye to yeh ek pehla kadam hoga ek behtereen
जवाब देंहटाएंsaamaj aur desh ki aur....mera to tyehe dil se yehi maana hai ....aab tak aape staff me main kam se kam 5 logo ko saakshar banayi hu..aur aab unke baacho ki padhayi ki bhi meri zimmedari hai...school se leke college tak,sab kuch..books bags,school fees aur unki progress par nazar rakhana...unhain main aapna maanti bhi hu...they are my godsons....Take responsibility
and MAKE a change.